राजस्थान में आगामी निकाय चुनाव 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रदेश के नगरीय निकायों में महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों के आरक्षण को लेकर गुरुवार को महत्वपूर्ण प्रक्रिया होने जा रही है। राज्य सरकार की ओर से निकाय प्रमुखों के पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। इस लॉटरी के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रदेश के अलग-अलग निकायों में प्रमुख का पद किस आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित किया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को सुबह 10:30 बजे जयपुर स्थित स्वायत्त शासन भवन में आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। इस प्रक्रिया में प्रदेश के कुल 309 नगरीय निकायों को शामिल किया गया है। लॉटरी के माध्यम से महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण की स्थिति तय की जाएगी।
यह प्रक्रिया आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आरक्षण तय होने के बाद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों की तस्वीर भी काफी हद तक साफ हो जाएगी।
309 निकायों के प्रमुख पदों का होगा आरक्षण
राजस्थान में होने वाले निकाय चुनाव के लिए कुल 309 निकायों के प्रमुख पदों पर आरक्षण तय किया जाना है। इनमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं से जुड़े प्रमुख पद शामिल हैं।
आरक्षण की लॉटरी के जरिए यह तय किया जाएगा कि किसी निकाय का प्रमुख पद अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या अनारक्षित वर्ग के लिए होगा।
आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित निकायों में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार भी उसी के अनुसार अपनी रणनीति तैयार कर सकेंगे।
ऑफलाइन पर्ची से निकाली जाएगी लॉटरी
निकाय प्रमुखों के आरक्षण की यह लॉटरी पारंपरिक तरीके से ऑफलाइन पर्ची के माध्यम से निकाली जाएगी। इसके लिए संबंधित निकायों के नाम की पर्चियां तैयार की जाएंगी।
सभी संबंधित निकायों के नाम की पर्चियों को एक बॉक्स में रखा जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत बॉक्स से पर्चियां निकाली जाएंगी और उसी के आधार पर अलग-अलग वर्गों के लिए निकायों का आरक्षण तय किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि लॉटरी की पर्ची निकालने के लिए संभवत: किसी बालक या बालिका को भी शामिल किया जा सकता है। इस तरह की प्रक्रिया का उद्देश्य लॉटरी को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरा करना है।
सबसे पहले SC वर्ग की लॉटरी
निकाय चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया में अलग-अलग वर्गों के लिए लॉटरी एक निर्धारित क्रम में निकाली जाएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार सबसे पहले अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी।
इसके बाद क्रमशः अन्य वर्गों के लिए लॉटरी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
लॉटरी का क्रम इस प्रकार रहेगा:
- अनुसूचित जाति (SC)
- अनुसूचित जनजाति (ST)
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
- अनारक्षित (General/Unreserved)
इस क्रम में आरक्षण तय होने के बाद 309 निकायों में प्रमुख पदों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
OBC के लिए सबसे अधिक 60 निकाय आरक्षित
आरक्षण की प्रस्तावित संख्या पर नजर डालें तो अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए सबसे अधिक निकाय आरक्षित किए जाएंगे। जानकारी के अनुसार कुल 60 निकायों के प्रमुख पद OBC वर्ग के लिए आरक्षित किए जाएंगे।
इसका मतलब है कि 309 निकायों में से 60 निकाय ऐसे होंगे जहां निकाय प्रमुख का पद OBC वर्ग के लिए निर्धारित होगा।
स्थानीय राजनीति में सक्रिय OBC वर्ग के संभावित उम्मीदवारों के लिए यह लॉटरी इसलिए बेहद महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उन्हें यह पता चलेगा कि किन निकायों में उनके वर्ग के उम्मीदवार चुनाव लड़ सकेंगे।
SC के लिए 50 निकाय होंगे आरक्षित
OBC के बाद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए भी बड़ी संख्या में निकाय आरक्षित किए जाएंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार SC वर्ग के लिए कुल 50 निकाय आरक्षित किए जाएंगे।
इन निकायों में प्रमुख पद SC वर्ग के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित होंगे। लॉटरी के दौरान यह तय होगा कि 50 आरक्षित निकाय कौन-कौन से होंगे।
SC वर्ग से जुड़े संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के लिए भी यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। लॉटरी के बाद वे संबंधित निकायों में चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दे सकेंगे।
ST वर्ग के लिए 11 निकाय आरक्षित
अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए कुल 11 निकाय आरक्षित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
लॉटरी के जरिए यह तय किया जाएगा कि प्रदेश के कौन से 11 निकाय ST वर्ग के लिए आरक्षित होंगे। इन निकायों में प्रमुख पद पर ST वर्ग से संबंधित उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगे, यदि लागू चुनाव नियमों के तहत अन्य पात्रताएं भी पूरी होती हैं।
188 निकाय रहेंगे अनारक्षित
आरक्षण की प्रक्रिया में SC, ST और OBC वर्ग के लिए निकाय तय किए जाने के बाद बाकी 188 निकाय अनारक्षित वर्ग के लिए रहेंगे।
कुल संख्या को देखें तो तस्वीर इस प्रकार बनती है:
| वर्ग | आरक्षित निकाय |
|---|---|
| अनुसूचित जाति (SC) | 50 |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 11 |
| अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) | 60 |
| अनारक्षित | 188 |
| कुल | 309 |
इस तरह सबसे ज्यादा निकाय अनारक्षित वर्ग के लिए होंगे, जबकि आरक्षित वर्गों में OBC के लिए सबसे अधिक 60 निकाय निर्धारित किए गए हैं।
महिलाओं के लिए भी रहेगा आरक्षण
निकाय प्रमुखों के आरक्षण में केवल जातिगत वर्गों का ही निर्धारण नहीं होगा, बल्कि महिलाओं के लिए भी आरक्षण लागू किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार SC, ST, OBC और अन्य वर्गों के लिए निर्धारित निकायों में से एक-तिहाई निकाय महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे। इसका मतलब है कि महिला उम्मीदवारों को भी स्थानीय निकाय चुनावों में प्रमुख पदों पर प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा।
महिला आरक्षण लागू होने के बाद संबंधित निकायों में प्रमुख पद के लिए पुरुष उम्मीदवारों की जगह पात्र महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेंगी। इससे स्थानीय निकायों में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ने की उम्मीद है।
लॉटरी के बाद क्या बदलेगा?
आरक्षण की लॉटरी पूरी होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव संभावित उम्मीदवारों की चुनावी रणनीति में देखने को मिलेगा। अभी कई नेता और स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र में चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन किसी निकाय के आरक्षित होने के बाद वहां उम्मीदवारों की दावेदारी भी उसी वर्ग के आधार पर तय होगी।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई निकाय OBC के लिए आरक्षित हो जाता है, तो वहां OBC वर्ग के संभावित उम्मीदवारों की दावेदारी मजबूत होगी। वहीं यदि कोई निकाय महिला के लिए आरक्षित होता है तो संबंधित आरक्षित वर्ग की महिला उम्मीदवार चुनाव में प्रमुख दावेदार बन सकती हैं।
इसी कारण लॉटरी का इंतजार लंबे समय से संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों द्वारा किया जा रहा है।
राजनीतिक दलों की भी बढ़ेगी सक्रियता
आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद राजनीतिक दलों की गतिविधियां भी तेज होने की संभावना है। पार्टियां आरक्षित निकायों में स्थानीय स्तर पर मजबूत उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर सकती हैं।
वहीं जिन निकायों को अनारक्षित रखा जाएगा, वहां अलग-अलग वर्गों के संभावित उम्मीदवार अपनी दावेदारी पेश कर सकेंगे। ऐसे में लॉटरी के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ना तय माना जा रहा है।
उम्मीदवारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है लॉटरी?
निकाय प्रमुख के पद का आरक्षण चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक होता है। उम्मीदवार को सबसे पहले यह देखना होता है कि संबंधित निकाय किस वर्ग के लिए आरक्षित है।
यदि कोई उम्मीदवार आरक्षित श्रेणी की पात्रता पूरी नहीं करता है, तो वह उस पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकता। इसलिए आरक्षण की लॉटरी सामने आने के बाद संभावित उम्मीदवारों को अपने चुनावी क्षेत्र और दावेदारी के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल जाएगी।
इसके अलावा राजनीतिक दल भी आरक्षण के आधार पर टिकट वितरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेंगे।
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