बीआर चोपड़ा की महाभारत में अश्वत्थामा और फिल्म गजनी में खलनायक की यादगार भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ अभिनेता प्रदीप रावत का 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 4 अगस्त 2026 को मुंबई में कैंसर से जूझते हुए उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय सिनेमा ने एक बहुमुखी और दमदार कलाकार को खो दिया, जिन्होंने हिंदी से लेकर दक्षिण भारतीय फिल्मों तक, चार दशकों से अधिक के करियर में 140 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
प्रदीप रावत का जन्म 21 जनवरी 1952 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1984 में फिल्म कानून क्या करेगा से की, हालांकि उन्हें पहचान 1985 में आई फिल्म मेरी जंग से मिली। 1980 के दशक में उन्होंने काश (1987), अग्निपथ (1990), बागी (1990) और कोयला (1997) जैसी फिल्मों में काम किया।
महाभारत: अश्वत्थामा बनने का सौभाग्य
प्रदीप रावत को देशव्यापी पहचान 1988 में मिली, जब उन्होंने बीआर चोपड़ा के प्रतिष्ठित टेलीविजन धारावाहिक महाभारत में अश्वत्थामा का किरदार निभाया। यह भूमिका उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई और आज भी उन्हें इसी किरदार के लिए सबसे अधिक याद किया जाता है। महाभारत के बाद उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बंगाली और भोजपुरी सहित कई भाषाओं की फिल्मों में काम किया।
आमिर खान के साथ यादगार फिल्में
प्रदीप रावत और आमिर खान की जोड़ी ने तीन यादगार फिल्में दीं। सरफरोश (1999) में उन्होंने सुल्तान की भूमिका निभाई। आमिर खान उनके इस काम से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने आधी रात को प्रदीप के घर फोन किया। दिलचस्प बात यह है कि प्रदीप की बहन ने इसे प्रैंक कॉल समझकर आमिर को डांट दिया था! बाद में आमिर ने लेखक उमाशंकर पाठक से बात कराई और तब जाकर परिवार को यकीन हुआ कि फोन वाकई आमिर खान का था।
इसके बाद लगान (2001) में प्रदीप रावत ने देवा सिंह सोढ़ी का किरदार निभाया। यह किरदार पहले मुकेश ऋषि को ऑफर हुआ था, लेकिन दक्षिण की फिल्मों में व्यस्त होने के कारण उन्होंने यह फिल्म नहीं की। प्रदीप ने इस भूमिका में एक सिख पूर्व सैनिक की भूमिका निभाई, जो क्रिकेट टीम का अहम हिस्सा बनता है। इस फिल्म ने उनकी खलनायकी छवि से परे अभिनय क्षमता को साबित किया।
गजनी (2008) में उन्होंने मुख्य खलनायक गजनी धर्मात्मा की भूमिका निभाई, जो आमिर खान के किरदार की प्रेमिका की हत्या कर देता है। दिलचस्प बात यह है कि प्रदीप रावत ने इस भूमिका को पहले तमिल संस्करण गजनी (2005) में भी निभाया था। तमिल फिल्म में उनके डबल रोल को काफी पसंद किया गया। आमिर खान ने प्रदीप के निधन पर कहा कि “गजनी उनके बिना काम नहीं करती”।
सलमान खान के साथ रिश्ते और गजनी का किस्सा
प्रदीप रावत और सलमान खान ने बागी (1990), पत्थर के फूल (1991) और संगदिल सनम (1994) जैसी कई फिल्मों में साथ काम किया। एक दिलचस्प किस्सा यह है कि सलमान खान को भी गजनी की पेशकश हुई थी। 27 मार्च 2025 को सिकंदर की प्रेस मीट में सलमान ने बताया कि प्रदीप ने उनसे कहा था कि निर्देशक मुरुगदास बहुत अनुशासित हैं और सलमान उनके साथ कैसे काम कर लेंगे। सलमान ने मजाक में कहा कि प्रदीप ने उनके साथ पांच फिल्में कीं और फिर ऐसा बोला।
दक्षिण भारतीय सिनेमा में कदम
प्रदीप रावत ने तेलुगु फिल्म सई (Sye) से दक्षिण भारतीय सिनेमा में कदम रखा। एसएस राजामौली के निर्देशन में बनी इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार (तेलुगु) से सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्होंने तेलुगु में चतृपति, स्टालिन, 1-नेनोक्कडिने और नेनु सैलजा जैसी फिल्मों में काम किया। तमिल सिनेमा में भी उनकी मजबूत पकड़ थी। उन्होंने कन्नड़ फिल्म पैरोडी, मलयालम फिल्म चाइना टाउन, बंगाली फिल्म हीरो 420 और भोजपुरी फिल्म क्रैक फाइटर में भी अभिनय किया। उनकी आखिरी हिंदी फिल्म छावा (2025) थी, जो 14 फरवरी 2025 को रिलीज हुई। इस फिल्म में उन्होंने विक्की कौशल के साथ येसाजी कांक की भूमिका निभाई। उनकी आखिरी तेलुगु फिल्म गायपद्द सिंहम (2026) थी।
व्यक्तिगत जीवन: दो शादियां और परिवार
प्रदीप रावत की व्यक्तिगत जिंदगी भी चर्चा का विषय रही। उनकी दो शादियां हुईं। पहली शादी ज्यादा समय तक नहीं चली और करीब साढ़े पांच महीने में ही तलाक हो गया। प्रदीप ने बताया था कि पहली पत्नी ने उन पर और परिवार पर झूठे आरोप लगाए थे।
इसके बाद उनकी मुलाकात कल्याणी रावत से हुई, जो दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी थीं। दोनों ने कुछ समय तक एक-दूसरे को डेट किया और 2006 में शादी कर ली। कल्याणी एक तेलुगु भाषी परिवार से हैं और उनका फिल्म इंडस्ट्री से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने हमेशा निजी जीवन को सार्वजनिक नजरों से दूर रखा। इस शादी से उनका एक बेटा है, विक्रमादित्य रावत, जो 18 वर्ष के हैं।
अंतिम दिन और कैंसर से जंग
प्रदीप रावत ब्लड कैंसर (रक्त कैंसर) से पीड़ित थे। चार साल पहले वे कैंसर को मात दे चुके थे, लेकिन पिछले डेढ़ महीने में यह बीमारी दोबारा लौट आई। उनके मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने बताया कि पिछले एक महीने से उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था। अचानक उनकी प्लेटलेट्स काफी कम हो गईं, जिससे वे उबर नहीं पाए। 4 अगस्त को शाम 6 से 6:30 बजे के बीच उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि
प्रदीप रावत का अंतिम संस्कार 5 अगस्त 2026 को मुंबई के गोरेगांव (पश्चिम) में बेस्ट कॉलोनी के पास किया गया। उनके पार्थिव शरीर को सुबह 2 बजे से 4 बजे तक गोरेगांव स्थित उनके आवास इंपीरियल हाइट्स में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसके बाद शव को ओशिवारा शमशान घाट (जोगेश्वरी पश्चिम) ले जाया गया, जहां शाम 4 बजे अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम संस्कार के दौरान उनके बेटे विक्रमादित्य भावुक नजर आए। कई हृदयविदारक वीडियो में वे अपने पिता का अंतिम संस्कार करते हुए टूटते हुए दिखे। अंतिम संस्कार में रजा मुराद भी शामिल हुए।
फिल्म जगत से यशपाल शर्मा ने सबसे पहले श्रद्धांजलि दी और लिखा, “प्रदीप रावत, हमारे गजनी, लगान के देवा, आरआईपी”। सोनू सूद ने इंस्टाग्राम पर प्रदीप की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर शेयर कर लिखा, “प्रदीप रावत भाई, आपकी कमी हमेशा महसूस होगी”। आमिर खान ने भी शोक व्यक्त किया।
विरासत
प्रदीप रावत ने भारतीय सिनेमा को एक बहुमुखी और दमदार कलाकार के रूप में अपनी छाप छोड़ी। महाभारत के अश्वत्थामा से लेकर गजनी के खौफनाक विलेन और लगान के देवा तक, उन्होंने हर किरदार में जान फूंकी। वे हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बंगाली और भोजपुरी सहित कई भाषाओं की फिल्मों में काम करके सच्चे पैन-इंडिया स्टार बने। चार दशकों से अधिक के करियर में 140 से अधिक फिल्मों में काम करने वाले प्रदीप रावत भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार खलनायकों में से एक थे।
उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री ने एक ऐसा कलाकार खो दिया, जो विलेन, सहायक अभिनेता और चरित्र अभिनेता — तीनों भूमिकाओं में समान रूप से सफल रहे। उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी। ॐ शांति।
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