1. संख्या क्या है?
किसी वस्तु, व्यक्ति या मात्रा की गिनती या माप को व्यक्त करने के लिए जिन संकेतों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें संख्या कहते हैं।
उदाहरण:
5 आम → यहाँ 5 एक संख्या है।
25 विद्यार्थी → यहाँ 25 एक संख्या है।
2. अंक (Digits)
संख्याओं को लिखने के लिए जिन मूल संकेतों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें अंक कहते हैं।
दशमलव पद्धति में कुल 10 अंक होते हैं:
0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9
उदाहरण:
संख्या 583 में 5, 8 और 3 तीन अलग-अलग अंक हैं।
ध्यान रखें:
अंक → 0 से 9 तक
संख्या → एक या अधिक अंकों से बनती है।
3. प्राकृतिक संख्याएँ (Natural Numbers)
गिनती करने के लिए प्रयोग की जाने वाली संख्याओं को प्राकृतिक संख्याएँ कहते हैं।
प्राकृतिक संख्याएँ:
1, 2, 3, 4, 5, 6, …
इनका सबसे छोटा मान 1 होता है।
उदाहरण:
1, 8, 25, 100 सभी प्राकृतिक संख्याएँ हैं।
महत्वपूर्ण:
0 प्राकृतिक संख्या है या नहीं, यह कुछ पुस्तकों में अलग-अलग परंपरा पर निर्भर करता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्यतः प्राकृतिक संख्याएँ 1 से शुरू मानी जाती हैं।
4. पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers)
प्राकृतिक संख्याओं में 0 को शामिल करने पर प्राप्त संख्याएँ पूर्ण संख्याएँ कहलाती हैं।
पूर्ण संख्याएँ:
0, 1, 2, 3, 4, 5, …
सबसे छोटी पूर्ण संख्या 0 है।
उदाहरण:
0, 5, 18, 100 पूर्ण संख्याएँ हैं।
5. पूर्णांक संख्याएँ (Integers)
धनात्मक संख्याएँ, ऋणात्मक संख्याएँ और शून्य मिलकर पूर्णांक संख्याएँ कहलाती हैं।
पूर्णांक:
…, -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, …
उदाहरण:
-10, -5, 0, 7, 15 सभी पूर्णांक हैं।
6. धनात्मक पूर्णांक
0 से बड़ी सभी पूर्णांक संख्याएँ धनात्मक पूर्णांक कहलाती हैं।
उदाहरण:
1, 2, 5, 10, 100
7. ऋणात्मक पूर्णांक
0 से छोटी सभी पूर्णांक संख्याएँ ऋणात्मक पूर्णांक कहलाती हैं।
उदाहरण:
-1, -2, -5, -20
8. परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers)
जिस संख्या को p/q के रूप में लिखा जा सके, जहाँ p और q पूर्णांक हों तथा q ≠ 0, उसे परिमेय संख्या कहते हैं।
रूप:
p/q, जहाँ q ≠ 0
उदाहरण:
1/2, 3/4, -5/7, 8/1
क्योंकि:
8 = 8/1
इसलिए प्रत्येक पूर्णांक परिमेय संख्या भी है।
9. अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers)
जिन संख्याओं को p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता, उन्हें अपरिमेय संख्याएँ कहते हैं।
इनका दशमलव विस्तार अनंत और अनावर्ती होता है।
उदाहरण:
√2, √3, √5, π
जैसे:
√2 = 1.41421356…
इसमें अंक चलते रहते हैं और कोई निश्चित पैटर्न बार-बार नहीं आता।
10. वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers)
परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का समूह वास्तविक संख्याएँ कहलाता है।
अर्थात:
वास्तविक संख्याएँ = परिमेय + अपरिमेय
उदाहरण:
-5, 0, 2, 3/4, √2, π आदि वास्तविक संख्याएँ हैं।
11. सम संख्याएँ (Even Numbers)
जो संख्याएँ 2 से पूर्णतः विभाजित हो जाती हैं, उन्हें सम संख्याएँ कहते हैं।
इनका अंतिम अंक सामान्यतः:
0, 2, 4, 6, 8
होता है।
उदाहरण:
2, 4, 16, 28, 100
12. विषम संख्याएँ (Odd Numbers)
जो संख्याएँ 2 से पूर्णतः विभाजित नहीं होतीं, उन्हें विषम संख्याएँ कहते हैं।
इनका अंतिम अंक:
1, 3, 5, 7, 9
होता है।
उदाहरण:
1, 3, 15, 27, 99
13. अभाज्य संख्याएँ (Prime Numbers)
जिस संख्या के केवल दो अलग-अलग धनात्मक गुणनखंड हों—1 और स्वयं वह संख्या, उसे अभाज्य संख्या कहते हैं।
उदाहरण:
2, 3, 5, 7, 11, 13, 17…
जैसे 7 के केवल दो गुणनखंड हैं:
1 और 7
इसलिए 7 अभाज्य है।
महत्वपूर्ण तथ्य
2 सबसे छोटी अभाज्य संख्या है और एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।
14. भाज्य संख्याएँ (Composite Numbers)
जिस संख्या के दो से अधिक धनात्मक गुणनखंड हों, उसे भाज्य संख्या कहते हैं।
उदाहरण:
4 के गुणनखंड:
1, 2, 4
इसलिए 4 भाज्य संख्या है।
अन्य उदाहरण:
6, 8, 9, 10, 12, 15…
महत्वपूर्ण
1 न तो अभाज्य संख्या है और न ही भाज्य संख्या।
15. सह-अभाज्य संख्याएँ (Co-Prime Numbers)
दो संख्याएँ जिनका HCF = 1 हो, उन्हें सह-अभाज्य संख्याएँ कहते हैं।
उदाहरण:
8 और 15
8 के गुणनखंड: 1, 2, 4, 8
15 के गुणनखंड: 1, 3, 5, 15
इनका HCF = 1
इसलिए 8 और 15 सह-अभाज्य हैं।
16. गुणनखंड / भाजक (Factors)
किसी संख्या को बिना शेष छोड़े विभाजित करने वाली संख्याएँ उस संख्या के गुणनखंड कहलाती हैं।
उदाहरण:
12 के गुणनखंड:
1, 2, 3, 4, 6, 12
क्योंकि 12 इन सभी से पूर्णतः विभाजित होता है।
17. गुणज (Multiples)
किसी संख्या को 1, 2, 3, 4… से गुणा करने पर प्राप्त संख्याएँ उस संख्या के गुणज कहलाती हैं।
उदाहरण:
5 के गुणज:
5, 10, 15, 20, 25, 30…
क्योंकि:
5 × 1 = 5
5 × 2 = 10
5 × 3 = 15
18. भाज्य (Dividend)
जिस संख्या को विभाजित किया जाता है, उसे भाज्य कहते हैं।
उदाहरण:
20 ÷ 5 = 4
यहाँ 20 भाज्य है।
19. भाजक (Divisor)
जिस संख्या से भाज्य को विभाजित किया जाता है, उसे भाजक कहते हैं।
20 ÷ 5 = 4
यहाँ 5 भाजक है।
20. भागफल (Quotient)
भाग देने के बाद प्राप्त परिणाम को भागफल कहते हैं।
20 ÷ 5 = 4
यहाँ 4 भागफल है।
21. शेषफल (Remainder)
भाग देने के बाद जो संख्या बच जाती है, उसे शेषफल कहते हैं।
उदाहरण:
17 ÷ 5
5 × 3 = 15
17 – 15 = 2
इसलिए:
भाज्य = 17
भाजक = 5
भागफल = 3
शेषफल = 2
सूत्र:
भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल
22. HCF / महत्तम समापवर्तक
दो या दो से अधिक संख्याओं का सबसे बड़ा समान गुणनखंड HCF कहलाता है।
इसे महत्तम समापवर्तक (म.स.) भी कहते हैं।
उदाहरण:
12 और 18
12 के गुणनखंड → 1, 2, 3, 4, 6, 12
18 के गुणनखंड → 1, 2, 3, 6, 9, 18
सबसे बड़ा समान गुणनखंड = 6
अतः:
HCF = 6
23. LCM / लघुत्तम समापवर्त्य
दो या दो से अधिक संख्याओं का सबसे छोटा समान गुणज LCM कहलाता है।
उदाहरण:
4 और 6
4 के गुणज → 4, 8, 12, 16…
6 के गुणज → 6, 12, 18…
सबसे छोटा समान गुणज = 12
अतः:
LCM = 12
24. अभाज्य गुणनखंड (Prime Factorization)
किसी संख्या को केवल अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में लिखना अभाज्य गुणनखंड कहलाता है।
उदाहरण:
24
= 2 × 12
= 2 × 2 × 6
= 2 × 2 × 2 × 3
अतः:
24 = 2³ × 3
25. भाज्यता के नियम (Divisibility Rules)
किसी संख्या को बिना भाग दिए यह पता लगाना कि वह किसी संख्या से विभाजित होगी या नहीं, इसके लिए भाज्यता के नियम प्रयोग किए जाते हैं।
2 से भाज्यता
जिस संख्या का अंतिम अंक 0, 2, 4, 6 या 8 हो, वह 2 से विभाज्य होती है।
उदाहरण: 124
अंतिम अंक 4 है → 2 से विभाज्य।
3 से भाज्यता
संख्या के सभी अंकों का योग 3 से विभाजित हो जाए तो संख्या 3 से विभाज्य होती है।
उदाहरण: 123
1 + 2 + 3 = 6
6, 3 से विभाज्य है।
अतः 123 भी 3 से विभाज्य है।
4 से भाज्यता
संख्या के अंतिम दो अंक 4 से विभाज्य हों तो पूरी संख्या 4 से विभाज्य होती है।
उदाहरण: 316
अंतिम दो अंक = 16
16, 4 से विभाज्य है।
अतः 316, 4 से विभाज्य है।
5 से भाज्यता
जिस संख्या का अंतिम अंक 0 या 5 हो, वह 5 से विभाज्य होती है।
उदाहरण: 125, 230
6 से भाज्यता
जो संख्या 2 और 3 दोनों से विभाज्य हो, वह 6 से विभाज्य होती है।
उदाहरण: 24
24 ÷ 2 = 12
24 ÷ 3 = 8
अतः 24, 6 से विभाज्य है।
8 से भाज्यता
संख्या के अंतिम तीन अंक 8 से विभाज्य हों तो पूरी संख्या 8 से विभाज्य होती है।
उदाहरण: 1,024
अंतिम तीन अंक = 024 = 24
24, 8 से विभाज्य है।
9 से भाज्यता
सभी अंकों का योग 9 से विभाज्य हो तो संख्या 9 से विभाज्य होती है।
उदाहरण: 729
7 + 2 + 9 = 18
18, 9 से विभाज्य है।
10 से भाज्यता
जिस संख्या का अंतिम अंक 0 हो, वह 10 से विभाज्य होती है।
उदाहरण: 120, 350, 1000
11 से भाज्यता
विषम और सम स्थानों के अंकों के योग का अंतर 0 या 11 का गुणज हो तो संख्या 11 से विभाज्य होती है।
उदाहरण: 121
(1 + 1) – 2 = 0
अतः 121, 11 से विभाज्य है।
26. संख्या रेखा (Number Line)
एक सीधी रेखा पर संख्याओं को क्रम से प्रदर्शित करने को संख्या रेखा कहते हैं।
उदाहरण:
← -3 — -2 — -1 — 0 — 1 — 2 — 3 →
संख्या रेखा में:
- दाईं ओर जाने पर संख्या बढ़ती है।
- बाईं ओर जाने पर संख्या घटती है।
- 0 के दाईं ओर धनात्मक संख्याएँ होती हैं।
- 0 के बाईं ओर ऋणात्मक संख्याएँ होती हैं।
27. स्थानीय मान (Place Value)
किसी संख्या में किसी अंक का स्थान के अनुसार जो मान होता है, उसे स्थानीय मान कहते हैं।
उदाहरण: 5,432
यहाँ 5 हजार के स्थान पर है।
इसलिए 5 का स्थानीय मान:
5,000
28. अंकित मान (Face Value)
किसी संख्या में किसी अंक का अपना वास्तविक मान अंकित मान कहलाता है।
उदाहरण:
5,432
इसमें 5 का अंकित मान = 5
जबकि स्थानीय मान = 5,000
29. संख्याओं का आरोही क्रम
छोटी संख्या से बड़ी संख्या की ओर क्रम लगाना आरोही क्रम कहलाता है।
उदाहरण:
2, 5, 8, 12, 20
30. संख्याओं का अवरोही क्रम
बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर क्रम लगाना अवरोही क्रम कहलाता है।
उदाहरण:
20, 12, 8, 5, 2
31. धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं की तुलना
संख्या रेखा में जो संख्या दाईं ओर होती है, वह बड़ी होती है।
उदाहरण:
5 > 2
इसी प्रकार:
-2 > -5
क्योंकि संख्या रेखा में -2, -5 के दाईं ओर है।
32. परस्पर अभाज्य / सह-अभाज्य संख्याएँ
यदि दो संख्याओं में 1 के अलावा कोई अन्य समान गुणनखंड नहीं है, तो वे परस्पर अभाज्य या सह-अभाज्य कहलाती हैं।
उदाहरण:
9 और 16
इनका HCF = 1
अतः 9 और 16 सह-अभाज्य हैं।
33. दशमलव संख्याएँ
जिन संख्याओं में पूर्णांक भाग और दशमलव भाग को अलग करने के लिए दशमलव बिंदु (.) का प्रयोग किया जाता है, उन्हें दशमलव संख्याएँ कहते हैं।
उदाहरण:
2.5, 3.14, 0.75
34. सांत दशमलव (Terminating Decimal)
जिस दशमलव संख्या के अंक कुछ स्थानों के बाद समाप्त हो जाते हैं, उसे सांत दशमलव कहते हैं।
उदाहरण:
0.5
0.25
2.75
35. असांत आवर्ती दशमलव
जिस दशमलव में अंक अनंत तक चलते हैं लेकिन कोई अंक या अंकों का समूह बार-बार दोहराता है, उसे असांत आवर्ती दशमलव कहते हैं।
उदाहरण:
1/3 = 0.3333…
यहाँ 3 लगातार दोहर रहा है।
36. असांत अनावर्ती दशमलव
जिस दशमलव का विस्तार अनंत तक चलता है और कोई निश्चित अंक या समूह बार-बार नहीं दोहराता, उसे असांत अनावर्ती दशमलव कहते हैं।
उदाहरण:
√2 = 1.41421356…
37. संख्या पद्धति में महत्वपूर्ण संबंध
संख्याओं का संबंध इस प्रकार समझें:
प्राकृतिक संख्याएँ ⊂ पूर्ण संख्याएँ ⊂ पूर्णांक ⊂ परिमेय संख्याएँ ⊂ वास्तविक संख्याएँ
और
अपरिमेय संख्याएँ भी वास्तविक संख्याओं का हिस्सा हैं।
इसलिए:
वास्तविक संख्याएँ = परिमेय संख्याएँ + अपरिमेय संख्याएँ
परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बिंदु
- सबसे छोटी प्राकृतिक संख्या = 1
- सबसे छोटी पूर्ण संख्या = 0
- सबसे छोटी अभाज्य संख्या = 2
- एकमात्र सम अभाज्य संख्या = 2
- 1 न अभाज्य है, न भाज्य
- प्रत्येक पूर्णांक एक परिमेय संख्या है।
- प्रत्येक प्राकृतिक संख्या एक पूर्ण संख्या है।
- HCF हमेशा दिए गए संख्याओं के गुणनखंडों से संबंधित है।
- LCM हमेशा दिए गए संख्याओं के गुणजों से संबंधित है।
- दो सह-अभाज्य संख्याओं का HCF = 1
- भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल
- शेषफल हमेशा भाजक से छोटा होता है।
- 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।
- 0 सम संख्या है।
- 0 न धनात्मक है, न ऋणात्मक।
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